Post-Quantum Cryptography क्या है? | Quantum Computer से सुरक्षित नई Encryption तकनीक



Post-Quantum Cryptography – नई सुरक्षा क्रांति


भूमिका: क्या हमारी आज की डिजिटल दुनिया सच में सुरक्षित है?

नमस्कार पाठकों 🙏, ArticleContHindi में आपका हार्दिक स्वागत है। इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें, क्योंकि यहाँ आपको वह सब मिलेगा जिसकी आपको वास्तव में आवश्यकता है।

आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वहाँ हमारी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा डिजिटल हो चुका है।
बैंक अकाउंट, UPI, ATM, WhatsApp चैट, Gmail, Aadhaar, PAN, Facebook, Instagram, Crypto Wallet — सब कुछ इंटरनेट से जुड़ा हुआ है।

हम अक्सर सोचते हैं:

“मेरी जानकारी सुरक्षित है, क्योंकि पासवर्ड है, OTP है, Encryption है।”

लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

आज की पूरी डिजिटल सुरक्षा एक ऐसी नींव पर टिकी है, जिसे Quantum Computer नाम की तकनीक आने वाले समय में हिला सकती है।
यहीं से शुरू होती है एक नई क्रांति — Post-Quantum Cryptography

यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का विषय नहीं है, बल्कि:

  • आपकी privacy
  • आपका पैसा
  • देश की security
  • और आने वाली पीढ़ियों का डिजिटल भविष्य

इन सब से जुड़ा हुआ मुद्दा है।


Quantum Computer क्या है? (आसान भाषा में समझिए)

आज तक जो कंप्यूटर हम इस्तेमाल करते हैं — मोबाइल, लैपटॉप, सर्वर — ये सब Classical Computer होते हैं।

Classical Computer कैसे सोचता है?

  • ये सिर्फ 0 या 1 में काम करता है
  • हर calculation step-by-step होती है

जैसे:

“अगर ताला खोलना है, तो एक-एक चाबी try करनी पड़ेगी।”



Quantum Computer कैसे अलग है?

आपको मै बताना चाहता हू कि, Quantum Computer बेसिस पर काम करता है:

  • Qubit पर
  • जो 0 और 1 दोनों एक साथ हो सकता है

इसे कहते हैं Superposition

इसका मतलब?

जहाँ normal computer 1 रास्ता देखता है,
Quantum computer लाखों रास्ते एक साथ देख सकता है।

एक और concept है — Entanglement
यानि एक qubit में बदलाव होते ही दूसरा qubit भी instantly बदल जाता है, चाहे दूरी कितनी भी हो।

👉 नतीजा: Quantum computer कुछ ऐसे problems को सेकंड्स में हल कर सकता है, जिनमें आज के supercomputer को हज़ारों साल लग जाएँ।


आज की Cryptography कैसे काम करती है?

Cryptography का मतलब क्या है:

जानकारी को इस तरह छुपाना कि सिर्फ सही व्यक्ति ही उसे पढ़ सके।

आज पूरी दुनिया में मुख्य रूप से 3 तरह की cryptography इस्तेमाल होती है:

1️⃣ RSA Cryptography

  • Banking
  • SSL Certificates
  • Secure Websites

RSA इस idea पर काम करता है:

बड़े numbers को multiply करना आसान है,
लेकिन उन्हें factor करना बहुत मुश्किल।

उदाहरण:

  • 17 × 23 = 391 (आसान)
  • 391 को वापस 17 और 23 में तोड़ना (मुश्किल)

2️⃣ ECC (Elliptic Curve Cryptography)

  • Mobile devices
  • Crypto wallets
  • Messaging apps

ये कम size की key में ज्यादा security देता है।


3️⃣ AES (Symmetric Encryption)

  • Data storage
  • Files
  • Hard drives

AES अभी भी quantum-safe माना जाता है (कुछ हद तक)।


Problem कहाँ है? Quantum Computer के आने से खतरा क्यों?

Quantum Computer के पास एक खास algorithm है:

👉 Shor’s Algorithm

Shor’s Algorithm:

  • RSA
  • ECC
    जैसी cryptography को तेज़ी से तोड़ सकता है

जिस काम में आज के computer को 1000 साल लगते, Quantum computer वही काम घंटों या मिनटों में कर सकता है।


सबसे खतरनाक बात क्या है?

“Harvest Now, Decrypt Later”

मतलब:

  • आज आपका encrypted data चोरी कर लिया जाएगा
  • अभी उसे पढ़ा नहीं जाएगा
  • लेकिन 10–15 साल बाद जब Quantum computer आएगा,
    तब सब decrypt कर लिया जाएगा

आपकी:

  • पुरानी emails
  • medical records
  • business secrets
  • government data

सब खतरे में।


यहीं से जन्म होता है Post-Quantum Cryptography का

Post-Quantum Cryptography (PQC) ऐसी encryption तकनीक है:

  • जो Quantum computer से भी सुरक्षित हो
  • और आज के normal computers पर भी चल सके

यानी:

“Quantum आने से पहले ही उसकी तैयारी।”


Post-Quantum Cryptography कैसे काम करती है?

PQC ऐसे mathematical problems पर based होती है:

  • जिन्हें Quantum computer भी efficiently solve नहीं कर सकता

अब चलिए, इसके मुख्य प्रकार आसान भाषा में समझते हैं 👇


1️⃣ Lattice-Based Cryptography

इसे समझिए ऐसे:

मान लीजिए:

  • एक बहुत बड़ा 3D जाल (lattice) है
  • उसमें एक point छुपा हुआ है

उस point को ढूँढना:

  • Classical computer के लिए मुश्किल
  • Quantum computer के लिए भी उतना ही मुश्किल

👉 यही वजह है कि lattice-based cryptography सबसे ज्यादा promising मानी जाती है।

NIST ने भी इसी category से कई algorithms select किए हैं:

  • Kyber
  • Dilithium

आज Google, Cloudflare जैसे बड़े नाम इसे test कर चुके हैं।


2️⃣ Hash-Based Cryptography

यह digital signatures के लिए इस्तेमाल होती है।

इसमें:

  • One-way hash functions
  • जैसे SHA-256

फायदा:

  • Quantum computer भी hash को reverse नहीं कर सकता (practically)

नुकसान:

  • Signature size बड़ा हो जाता है

लेकिन security जब priority हो, तो size secondary हो जाता है।


3️⃣ Code-Based Cryptography

यह error-correcting codes पर आधारित होती है।

इसे समझिए:

जैसे किसी भाषा को इस तरह बदल दिया जाए कि
बिना सही rule के कोई उसे समझ ही न पाए।

McEliece algorithm इसका famous example है।


4️⃣ Multivariate Cryptography

यह कई equations को एक साथ solve करने पर आधारित होती है।

Quantum computer के लिए भी:

  • इन equations को efficiently solve करना बहुत मुश्किल है।

दुनिया Post-Quantum के लिए क्या कर रही है?

🔹 NIST (USA)

NIST ने 2016 से PQC competition शुरू किया। 2022–2024 में final algorithms announce किए गए।

आज ये standards बनने की ओर हैं।


🔹 Google

Google ने Chrome में:

  • Post-Quantum + Classical hybrid encryption test किया।

🔹 Microsoft & IBM

  • Cloud security
  • Enterprise systems
    में PQC integrate करने की तैयारी।

🔹 Blockchain और Crypto

Quantum आने से:

  • Bitcoin की old wallets खतरे में हैं
    इसलिए Quantum-resistant blockchains पर काम चल रहा है।

भारत के लिए Post-Quantum Cryptography क्यों जरूरी है?

भारत में:

  • Aadhaar
  • UPI
  • DigiLocker
  • Defence systems
  • Space missions

सब digital security पर depend करते हैं।

अगर Quantum attack हुआ:

  • Banking collapse
  • Data leak
  • National security threat

इसलिए:

  • Indian government
  • DRDO
  • ISRO
  • CERT-In

सब PQC research में interest ले रहे हैं।


Post-Quantum Cryptography और आम इंसान

आप सोच सकते हैं:

“इसका मुझसे क्या लेना-देना?”

लेकिन सच ये है:

  • आपका WhatsApp
  • आपका Google account
  • आपका bank app

सब धीरे-धीरे PQC adopt करेंगे।

आपको शायद पता भी नहीं चलेगा, लेकिन background में security बदल चुकी होगी।


Career और Future Scope

अगर आप:

  • Student हैं
  • Tech field में हैं

तो PQC एक golden opportunity है।

Fields:

  • Cyber Security
  • Cryptography Research
  • Government projects
  • International companies

2025–2035 में PQC experts की demand बहुत ज्यादा होने वाली है।


भविष्य की दुनिया: 2030 के बाद

2030 के बाद:

  • Quantum computer reality होगा
  • Old encryption obsolete होगी
  • Post-Quantum Cryptography नया normal बनेगी

जो आज prepare नहीं करेगा, वह कल पछताएगा।


निष्कर्ष: नई सुरक्षा क्रांति की शुरुआत

Post-Quantum Cryptography सिर्फ एक तकनीक नहीं, यह एक digital survival strategy है।

जिस तरह:

  • लॉक बदलते हैं
  • घर मजबूत करते हैं

उसी तरह:

  • Encryption भी evolve होना जरूरी है।

Quantum computer खतरा भी है, और opportunity भी।

जो देश, company और इंसान आज तैयारी करेगा, वही कल सुरक्षित रहेगा।


आखिरी बात

“Security कोई एक दिन का काम नहीं,
यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।”

Post-Quantum Cryptography उसी प्रक्रिया का अगला कदम है।


अगर आपको यह जानकारी मददगार लगी हो, तो हमें बेहद खुशी होगी। पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका तहे दिल से धन्यवाद। 🙏

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