नवरात्रि 2025 Day 5: मां दुर्गा का पांचवां रूप माता स्कंदमाता

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नमस्ते दोस्तों 🙏, ArticleContHindi ब्लॉग में आपका स्वागत है। मैं आपसे यही कहना चाहूंगा कि आप यह पूरा आर्टिकल पढ़ें, ताकि आपको वह जानकारी मिल सके जिसकी आपको ज़रूरत है।


नवरात्रि का पाँचवां दिन – माता स्कंदमाता की कथा, स्वरूप और महत्व

प्रस्तावना

भारत में नवरात्रि का पर्व अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है और प्रत्येक स्वरूप जीवन को आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

नवरात्रि के पाँचवें दिन मां दुर्गा के जिस रूप की उपासना की जाती है, वह हैं माता स्कंदमाता। ये मां का वह रूप हैं जिन्हें करुणा, मातृत्व और शक्ति की देवी माना जाता है।


माता स्कंदमाता का नाम और अर्थ

"स्कंदमाता" नाम दो शब्दों से मिलकर बना है –

  • स्कंद – भगवान कार्तिकेय (मां पार्वती और भगवान शिव के पुत्र, जिन्हें देवसेना का सेनापति माना जाता है)।
  • माता – मां।

अर्थात, स्कंदमाता वह हैं जो भगवान कार्तिकेय की जननी हैं।


पौराणिक कथा – माता स्कंदमाता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राक्षस तारकासुर ने अत्याचार बढ़ाए, तो देवताओं के लिए उसे पराजित करना असंभव हो गया। उसे केवल भगवान शिव और पार्वती के पुत्र द्वारा ही मारा जा सकता था।

तब मां पार्वती ने भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को जन्म दिया। स्कंद बड़े होकर देवताओं के सेनापति बने और तारकासुर का वध किया। इस कारण मां पार्वती को स्कंदमाता कहा गया।


माता स्कंदमाता का स्वरूप

  • माता स्कंदमाता पद्मासना (कमल पर विराजमान) रहती हैं।

  • इनके पास पाँच भुजाएँ होती हैं –

    • एक भुजा में कमल पुष्प,

    • दूसरी में बाल स्कंद (कार्तिकेय),

    • एक हाथ वरद मुद्रा में,

    • अन्य हाथों में शक्ति और करुणा के प्रतीक अस्त्र।

  • उनका वाहन सिंह है, जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है।

  • उनका मुखमंडल अत्यंत शांत, सौम्य और करुणा से भरा हुआ है।


नवरात्रि के पाँचवें दिन पूजा विधि

पूजन की तैयारी

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  3. मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र को कमल के आसन पर स्थापित करें।

पूजन प्रक्रिया

  • दीप जलाएँ और धूप-गंध अर्पित करें।
  • माता को पीले और नारंगी रंग के पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • भोग में केले और मिठाई अर्पित करें।
  • माता का ध्यान करते हुए यह मंत्र जपें:

"ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः"


पूजा का महत्व और लाभ

  • माता स्कंदमाता की पूजा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • संतान प्राप्ति और संतान की उन्नति के लिए यह पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
  • साधक को ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
  • मां की कृपा से भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।


आध्यात्मिक दृष्टिकोण

माता स्कंदमाता का संबंध विशुद्धि चक्र (कंठ चक्र) से माना जाता है।
यह चक्र वाणी, सत्य और भक्ति का प्रतीक है।
जब यह चक्र सक्रिय होता है तो साधक के जीवन में आत्मबल, स्पष्टता और दिव्यता का संचार होता है।


दार्शनिक संदेश

माता स्कंदमाता हमें यह संदेश देती हैं कि –

  • मातृत्व केवल संतान पालन तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण से जुड़ा है।
  • मां का स्वरूप करुणा और त्याग का प्रतीक है।
  • हमें अपने जीवन में धैर्य, विनम्रता और सेवा भाव अपनाना चाहिए।


आधुनिक जीवन में माता स्कंदमाता का महत्व

आज के समय में जब तनाव, कलह और असंतोष जीवन का हिस्सा बन गए हैं, मां स्कंदमाता का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि –

  • परिवार में प्रेम और एकता बनाए रखना सबसे बड़ा धर्म है।
  • करुणा और धैर्य से हर समस्या का समाधान संभव है।
  • सच्चा सुख सेवा और त्याग में है।


निष्कर्ष

नवरात्रि का पाँचवां दिन मां स्कंदमाता की पूजा को समर्पित है।
वे केवल भगवान कार्तिकेय की माता ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की करुणामयी माता हैं।
उनकी आराधना से भक्त को सांसारिक सुख, संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माता स्कंदमाता हमें यह सिखाती हैं कि –

  • परिवार में प्रेम और करुणा बनाए रखें,
  • धैर्य और भक्ति से कठिनाइयों को पार करें,
  • और त्याग व सेवा में ही सच्चा जीवन सुख है।


मुझे उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। आपने यह पूरा आर्टिकल पढ़ा, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙏


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