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🌕 धनतेरस 2025: इतिहास, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की सम्पूर्ण जानकारी
🪔 परिचय
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है।
धनतेरस न केवल धन-समृद्धि का त्योहार है, बल्कि यह आरोग्य, सौभाग्य और सुख-शांति की कामना का भी प्रतीक है।
🕉️ धनतेरस का इतिहास (इतिहास और पौराणिक कथा)
धनतेरस के पीछे कई धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं, जिनमें से प्रमुख दो हैं —
1️⃣ समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का प्रकट होना
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया, तब चौदह रत्नों के साथ भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए।
वे अपने हाथों में अमृत का कलश और औषधियों से भरा पात्र लिए हुए थे। यही कारण है कि इस दिन को “धन्वंतरि त्रयोदशी” कहा गया और यह आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
2️⃣ राजकुमार हेम का कथा प्रसंग
एक अन्य कथा के अनुसार, एक राजा के पुत्र की कुंडली में 13वें वर्ष में मृत्यु योग लिखा था। जब वह दिन आया, उसकी पत्नी ने दरवाजे पर सोने-चाँदी के गहनों का ढेर, दीपकों की पंक्ति और भजन-संगीत की व्यवस्था की।
जब यमराज उसकी आत्मा लेने आए, तो दीपों की रोशनी और संगीत में मंत्रमुग्ध होकर वे लौट गए।
तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि धनतेरस की रात दीप जलाकर यमराज की आराधना की जाए ताकि मृत्यु और अकाल संकट से रक्षा हो।
💰 धनतेरस का धार्मिक महत्व
धनतेरस का अर्थ है “धन की तेरस” — यह दिन लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने और नए आरंभ के लिए शुभ माना जाता है।
इस दिन:
- सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, वाहन आदि खरीदना शुभ होता है।
- नए व्यापार की शुरुआत और निवेश करना लाभदायक रहता है।
- स्वास्थ्य से संबंधित वस्तुओं की खरीद भी आयुर्वेदिक दृष्टि से शुभ मानी जाती है।
धनतेरस के दिन पूजा करने से कुबेर देव, लक्ष्मी जी और धन्वंतरि भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
🪙 धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
- त्रयोदशी प्रारंभ: 20 अक्टूबर सुबह 10:18 बजे
- त्रयोदशी समाप्त: 21 अक्टूबर सुबह 08:42 बजे
- शुभ पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 06:50 बजे से रात 08:20 बजे तक
- दीपदान मुहूर्त: सूर्यास्त के बाद यमदीप जलाने का शुभ समय।
🪔 धनतेरस पूजा विधि (व्रत और पूजन विधि)
धनतेरस की पूजा में लक्ष्मी जी, कुबेर देव और धन्वंतरि भगवान की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं पूरी विधि:
🧹 1. घर की सफाई और सजावट
- धनतेरस से पहले घर की साफ-सफाई करें।
- दरवाजे पर तोरण और रंगोली बनाएं।
- दीपक और फूलों से सजावट करें।
🌼 2. पूजन की तैयारी
- पूजा स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- उस पर लक्ष्मी जी, कुबेर जी और धन्वंतरि जी की मूर्ति स्थापित करें।
- जल, धूप, दीप, पुष्प, चंदन, फल, मिठाई और धान रखें।
🕯️ 3. पूजन विधि
- गणेश जी की पूजा से प्रारंभ करें।
- इसके बाद लक्ष्मी जी का आवाहन करें और कुबेर देव की पूजा करें।
- धन्वंतरि भगवान को तुलसी और औषधि अर्पित करें।
- लक्ष्मी जी को कमल पुष्प, कुबेर जी को चावल, और धन्वंतरि जी को जल अर्पण करें।
- आरती करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
💎 धनतेरस पर क्या खरीदें (शुभ खरीदारी)
धनतेरस के दिन खरीदारी को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
🛍️ शुभ वस्तुएं:
- सोना या चांदी के सिक्के
- बर्तन (चांदी, स्टील या पीतल)
- गहने और जेवरात
- नया झाड़ू (समृद्धि का प्रतीक)
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या वाहन
- आयुर्वेदिक औषधियां
🪙 नोट:- लोहा, तेल, और काला कपड़ा इस दिन खरीदना अशुभ माना जाता है।
🌸 धनतेरस से जुड़ी परंपराएँ
- यमदीपदान: सूर्यास्त के बाद घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर रखा जाता है। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है और इसे यमदीपदान कहा जाता है।
- स्वास्थ्य की कामना: चूंकि यह धन्वंतरि देव का दिन है, इसलिए लोग अपने और परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
- व्यापारिक आरंभ: व्यापारी वर्ग इस दिन अपनी नई बही-खातों की पूजा करते हैं।
🪷 धनतेरस का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
धनतेरस केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी विशेष दिन है।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि धन का अर्थ केवल पैसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संतोष और परिवारिक एकता भी है।
आयुर्वेद के संस्थापक धन्वंतरि जी की आराधना के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।”
🧿 धनतेरस के शुभ मंत्र
🌼 लक्ष्मी पूजन मंत्र
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः॥”
🌼 कुबेर पूजन मंत्र
“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः॥”
🌼 धन्वंतरि पूजन मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय नमः॥”
🔱 धनतेरस और आयुर्वेद का संबंध
धन्वंतरि भगवान को आयुर्वेद का जनक माना गया है।
धनतेरस के दिन लोग आयुर्वेदिक औषधियाँ और जड़ी-बूटियाँ खरीदते हैं।
आज के समय में भी यह पर्व स्वास्थ्य जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
🌙 धनतेरस और दीपावली का संबंध
धनतेरस से ही दीपावली उत्सव का आरंभ होता है।
पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दीपावली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पाँचवे दिन भाई दूज मनाई जाती है।
इस प्रकार, धनतेरस समृद्धि और उज्ज्वलता के पाँच दिवसीय पर्व की प्रथम कड़ी है।
🪔 धनतेरस से जुड़े प्रमुख प्रश्न (FAQ)
❓1. धनतेरस क्यों मनाई जाती है?
👉 धनतेरस भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने और धन-समृद्धि के स्वागत के लिए मनाई जाती है।
❓2. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
👉 सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, इलेक्ट्रॉनिक सामान और आयुर्वेदिक औषधियाँ।
❓3. क्या धनतेरस पर वाहन खरीद सकते हैं?
👉 हाँ, इस दिन वाहन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
❓4. धनतेरस के दिन यमदीप क्यों जलाया जाता है?
👉 अकाल मृत्यु और संकटों से बचाव के लिए यमराज को प्रसन्न करने हेतु।
❓5. क्या धनतेरस पर उधार देना ठीक है?
👉 इस दिन किसी को उधार देना अशुभ माना गया है, क्योंकि यह धन की निकासी का संकेत है।
🌺 निष्कर्ष
धनतेरस केवल खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आस्था, आरोग्य और समृद्धि का पर्व है।
यह दिन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धन केवल पैसा नहीं बल्कि स्वास्थ्य, परिवार और सकारात्मक ऊर्जा है।
इस धनतेरस, आइए हम सब मिलकर अपने जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य और समृद्धि का दीप जलाएं।
"शुभकामनाएं"
🌕 “आपके जीवन में धन की वर्षा हो, आरोग्य और सौभाग्य का दीप सदा जलता रहे।” 🪔


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